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सरस्वतीपूजा निबंध:। সরস্বতীপূজা নিবন্ধঃ। Sanskrit Essays on Saraswati Puja For Class IX-XII

सरस्वतीपूजा निबंध:। সরস্বতীপূজা নিবন্ধঃ। Sanskrit Essays on Saraswati Puja For Class IX-XII
सरस्वतीपूजा निबंध:। সরস্বতীপূজা নিবন্ধঃ। Sanskrit Essays on Saraswati Puja For Class IX-XII

সরস্বতী বিদ্যায়াঃ দেবী। অতঃ অস্যাঃ পূজা প্রধানতঃ বিদ্যার্থিভিঃ ক্ৰিয়তে। বসন্তপঞ্চম্যাং তিথৌ ভবতি সরস্বতীপূজা। বিদ্যায়াঃ অধিষ্ঠাত্রী দেবী শুভ্রবর্ণা, শ্বেতপদ্মাসনা, বীণাপাণিঃ পুস্তকহস্তা ভবতি। বালকাঃ বালিকাশ্চ সর্বে নবীনবস্ত্রং পরিধায় দেব্যৈ পুস্পাঞ্জলিং যচ্ছন্তি। বয়ং দেব্যাঃ বিদ্যাম্ ইচ্ছামঃ। বস্তুতঃ কেবলং পূজয়া দেবী তুষ্টা ন ভবতি, অধ্যয়নসহিতা পূজা এব তস্যাঃ তুষ্টিকারণম্ ভবতি ইতি ধ্যেয়ম্।
सरस्वतीपूजा निबंध:। সরস্বতীপূজা নিবন্ধঃ। Sanskrit Essays on Saraswati Puja For Class IX-XII
सरस्वतीपूजा निबंध:। সরস্বতীপূজা নিবন্ধঃ। Sanskrit Essays on Saraswati Puja For Class IX-XII

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आर्यभटः निबंध: | Sanskrit Essay on Aryabhata

आर्यभटः निबंध: | Sanskrit Essay on Aryabhata आर्यभटः (४७६ - ५५०) महान् गणितज्ञः, ज्योतिर्विदः च आसीत्। तस्य जन्म अश्मकदेशे अभवत्। सः कुसुमपुर्याम् अपठत् अवसत् च। यदा सः त्रयोविंशतिवर्षीयः तदा सः आर्यभटीयम्अलिखत्। केषाञ्चन वर्षाणाम् अनन्तरं सः आर्यभटीयसिद्धान्तम् अलिखत्। सः गुप्तकाञ्चनकाले अवसत्। ज्योतिश्शास्त्रस्य शास्तीयत्वं परिकल्पितम् आर्यभटेन एव । आर्यभटम् ’ आर्यभट्टः ’ इत्यपि निर्दिशन्ति केचन । आर्यभटः क्रि.श. ४७६ तमे वर्षे पाटलीपुत्रनगरे (पाटना) जातः इति, क्रि.श. ४९९ तमे वर्षे एषः ‘आर्यभटीयम्’ इति ग्रन्थं लिखितवान् इति च ज्ञायते । एषः स्वस्य २३ तमे वयसि एव एतं सिद्धान्तप्रतिपादकं श्रेष्ठं ग्रन्थं रचितवान् आसीत् । एतस्मात् एव वयम् ऊहितुं शक्नुमः यत् एतस्य प्रतिभा कीद्दशी आसीत् इति । आर्यभटीयग्रन्थे महासङ्ख्याः अपि संज्ञारूपेण कथं सङ्ग्रहेण लेखनीयाः इति विषयः, वर्ग-घनमूल-त्रिभुजादिगणितविषयाः, कटपयादिसंज्ञाक्रमः, कालविभाग-नक्षत्रगति-भगण-दिनरात्र्यादिविषयाः चापि विवृताः सन्ति । ‘मया नूतनतया किमपि न उच्यते, पूर्वजैः उक्तम् एव स्फुटतया निरूप्यते’ इति स्वग्रन्थे उक्तवान् अस्ति एषः । पञ...

महाभारतम् निबंध:| Sanskrit Essay on Mahabharata

Sanskrit Essay on Mahabharata महाभारतम् महर्षिणा वेदव्यासेन विरचितः बहुप्रसिद्धः इतिहासः विद्यते। अस्मिन् ग्रन्थे कौरव-पाण्डवानां महायुद्दं मुख्य-विषयरूपेण वर्णितमस्ति। मानवजीवनस्य धर्मार्थ-काम-मोक्ष-रूपाः समस्तपुरुषार्थाः अत्र विशालग्रन्थे सन्निवेशिताः। अस्य महाभारत स्य भीष्मपर्वणि श्रीमद्‌भगवद्‌गीता विद्यते। भगवता कृष्णेन मोहग्रस्तम् अर्जुनं प्रति ज्ञान-कर्म-भक्ति-विषयकः उपदेशः गीतायां प्रदत्तः। अस्यां गीतायामपि अष्टादश अध्यायाः सन्ति। मानव-जीवनस्य विविधविषयाः अत्र समीचीनतया प्रतिपादिताः सन्ति। इयं विश्वजनीन-कृतिः कालजयिनी चिरन्तनी एव। Sanskrit Essay on Mahabharata Sanskrit Essay on Mahabharata महाभारतम् निबंध: | Sanskrit Essay on Mahabharata

Essay on Holi in Sanskrit for Kids of Class VIII

Essay on Holi in Sanskrit for Kids of Class VIII Essay on Holi in Sanskrit for Kids of Class VIII

पाणिनिः | Sanskrit Essay On Panini

पाणिनिः  | Sanskrit Essay On Panini पाणिनिः संस्कृतस्य महान् वैयाकरणः ।  पाणिनेः जन्म क्रिस्तपूर्वसप्तमशताब्द्यां शलातुरग्रामे अभवत् । अतः तस्य 'शलातुरीयः' इति नाम अति प्रसिद्धम् अस्ति । वर्तमानकाले पाकिस्थानदेशे स्थितः लहुरनामकः ग्रामः एव शलातुरग्रामः अस्ति । पाणिनेः मातुः नाम दाक्षी । अतः एव सः दाक्षीपुत्रः इत्यपि कथ्यते । 'पणिनः' इति तस्य पितुः नाम । अतः तस्य नाम ' पाणिनिः ' अभवत् । आचार्यः वर्षः पाणिनेः गुरुः आसीत् । पाणिनिः 'तक्षशिला'विद्यापीठे शिक्षां प्राप्तवान्  |  पञ्चतन्त्रानुसारेण पाणिनेः मुत्युः सिंहकारणात् अभवत् - 'सिंहो व्याकरणस्य कर्तुरहरत् प्राणान् प्रियान् पाणिनेः ।' परम्परानुसारेण पाणिनेः मृत्युः त्रयोदशीतिथ्याम् अभवत् । अतः एव पण्डितपरम्परायाम् अधुना अपि त्रयोदश्यां व्याकरणस्य अनध्यायः भवति | पाणिनिः  | Sanskrit Essay On Panini पाणिनिः  | Sanskrit Essay On Panini

महाराष्ट्र निबंध: | Sanskrit Essay on Maharashtra

महाराष्ट्र निबंध: | Sanskrit Essay on Maharashtra महाराष्ट्रं भारतस्‍य पश्‍चिमे कश्चन प्रान्‍त: अस्‍ति। मुम्बयी इति महाराष्ट्रराज्यस्य राजधानी। अन्यानि नगराणि नागपुरं, पुणे, सोलापुरम् इत्यादयः। भारतस्य ९.८४% क्षेत्रफलं महाराष्ट्रराज्ये अस्ति। महाराष्ट्रस्य जनसन्ख्या ९,६७,५२,२४७ मिता । जनसंख्यायाः घनत्वम् ३१४.४२ जनाः प्रति वर्ग किमी. इत्यस्ति। महाराष्ट्रम् अतीव धनसम्पन्नम् राज्यम् अस्ति। अयं प्रान्तः भारतस्य सकलगृहोत्पादने १३.२% , औद्योगिक उत्पादने च १५% च योगदानं करोति  महाराष्ट्रस्य पश्चिमे सिन्धुसागरः, उत्तरे दादरा ,नगर हवेली, मध्यप्रदेशः च, तस्य पूर्वदिशायां छत्तीसगढ़ः दक्षिणपूर्वदिशायाम् आंध्रप्रदेशः तथा दक्षिणदिशायां कर्नाटकं गोवा च इति राज्यानि सन्ति। महाराष्ट्रस्य क्षेत्रफलं ३,०७,७३१ वर्ग किमी. अस्ति. भारतस्य ९.८४% क्षेत्रफलं महारष्ट्ररज्ये अस्ति.  सह्याद्री पर्वतमाला (वा पश्चिमघट्ट:) महाराष्ट्रस्य तीरस्य समान्तरम् अस्ति। तस्याः पश्चिमे कोङ्कण-तटप्रदेश: वर्तते। पर्वतमालायाः पूर्वदिशायां दक्खन् अधित्यका: सन्ति। एष: बह्वीनां नदीनां स्रोतःअस्ति। महाराष्ट्र निबंध: | Sa...

दूरदर्शनस्य: प्रभावः निबंध:। দূরদর্শনস্য প্রভাবঃ নিবন্ধঃ। Sanskrit Essays on Television Effect For Class IX-XII

আধুনিককালে দূরদর্শনম্ একম্ অতীব শক্তিশালি গণমাধ্যমম্। মানবজীবনে অস্য সুদূরপ্রসারী প্রভাবঃ পরিলক্ষ্যতে। দূরদর্শনং বিনা আধুনিকজীবনং নৈব সম্ভবতি। তত্র প্রদর্শিতং রাজনৈতিকঘটনাদিকং চলচ্চিত্রক্রীড়াদিকং চ দৃষ্ট্বা বয়ম্ অস্মাকং জীবনং সুন্দরতরং কর্তুং পারয়ামঃ। এষঃ হি দূরদর্শনস্য সুপ্রভাবঃ। পরন্তু এতাদৃশস্য দূরদর্শনস্য কুপ্রভাবঃ অপি বিদ্যতে। পুনঃ পুনঃ কুরুচিকরং দৃশ্যং হিংসাসম্বলিতং দৃশ্যং চ অল্পবয়স্কান্ অধিকম্ আকর্ষয়তঃ। কার্টুনেত্যাদিকং অধিকং দৃষ্ট্বা সুকুমারমতয়ঃ বালকাঃ বালিকাঃ চ স্বপাঠং বিস্মরন্তি। এবং রূপেণ দূরদর্শনস্য প্রভাবঃ বহুবিস্তৃতং পরিলক্ষ্যতে।

वर्षाकालः निबंध:। বর্ষাকালঃ নিবন্ধঃ। Sanskrit Essays on Rainy Season For Class IX-XII

वर्षाकालः निबंध:। বর্ষাকালঃ নিবন্ধঃ। Sanskrit Essays on Rainy Season For Class IX-XII ঋতুনাং মধ্যে বর্ষাকালঃ দ্বিতীয়ঃ। আষাঢ়শ্রাবণৌ ব্যাপ্য অস্য স্থিতিঃ। নিদাঘতাপিতা ধরণী বষার্গমে শীতলা ভবতি। অস্মিন্সময়ে জলধরাঃ প্রবলং বর্ষন্তি। গ্রাম্যপথাঃ পিচ্ছিলাঃ ভবন্তি। অতিবর্ষণেন তু প্লাবনং ভবতি। তথাপি রম্যঃ বর্ষাকালঃ । वर्षाकालः निबंध:। বর্ষাকালঃ নিবন্ধঃ। Sanskrit Essays on Rainy Season For Class IX-XII

कीदृशः शिक्षकः तवाभिमतः निबंध:। কীদৃশঃ শিক্ষকঃ তবাভিমতঃ নিবন্ধঃ। Sanskrit Essays on What Kind of Teacher Do You Think For Class IX-XII

স এব সুশিক্ষকঃ যঃ সুষ্ঠু শিক্ষয়তি। শিক্ষকঃ সন্মার্গম্ অপি উপদিশতি। সঃ যথা উপদিশতি তথা যদি স্বয়ম্ আচরতি তর্হি স এব শিক্ষকঃ সার্থকনামা। কেবলং তাড়নেন ভর্ৎসনেন শিক্ষণবিধেঃ সৌকর্যং ন স্যাৎ।ছাত্রবাৎসল্যং শিক্ষকস্য গুণবিশেষঃ। এবং নীতিনিপুণঃ কর্তব্যপরায়ণঃ স্নেহবৎসলশ্চ শিক্ষকো মমাভিমতঃ।

प्रभातकाल: निबंध: | প্রভাতকালঃ নিবন্ধঃ | Sanskrit Essay on Morning for Class IX-XII

प्रभातकाल: निबंध: | প্রভাতকালঃ নিবন্ধঃ | Sanskrit Essay on Morning for Class IX-XII রমণীয়ঃ খলু প্রভাতকালঃ । পূর্বস্যাং দিশি উদেতি সূর্যঃ। অস্মিন্ শয়ে বিবিধানি কসমানি প্রস্ফটন্তি, বাতি চ সিধঃ সমীরণঃ। মধুরং কূজন্তি। কৃষকাঃ ক্ষেত্রাভিমুখং প্রযান্তি ছাত্রাশ্চ পাঠে চিত্তং নিবেশয়ন্তি। অয়ং কালঃ সর্বম্মে রােগ প্রযান্তি ছাত্রাশ্চ পাঠে চিত্তং নিবেশয়ন্তি। অয়ং কালঃ সর্বম্মে রােচতে। प्रभातकाल: निबंध: | প্রভাতকালঃ নিবন্ধঃ | Sanskrit Essay on Morning for Class IX-XII

बालगङ्गाधर तिलकः निबंध: | Sanskrit Essay on Bal Gangadhar Tilak

बालगङ्गाधर तिलकः निबंध: |  Sanskrit Essay on Bal Gangadhar Tilak Sanskrit Essay on Bal Gangadhar Tilak बालगङ्गाधर तिलकः निबंध:   |  Sanskrit Essay on Bal Gangadhar Tilak बालगङ्गाधर तिलकः (1856-1920) महान् राष्ट्रभक्तः । भारतस्य स्वातन्त्रसङ्ग्रामे प्रमुखः नेता आसीत् । स्वतन्त्रताया: आन्दोलनस्य प्रसङ्गे स: अघोषयत्‌, "स्वराज्यम्‌ अस्माकं जन्मसिद्ध: अधिकार:." इति ।  समाचारपत्राणां प्रकाशनं सम्पादनं च कृत्वा स: देशसेवां करोति स्म । बहुबारम्‌ कारागारवासम् अनुभूतवान् स: संस्कृते विद्वान्‌ आसीत्‌ । बालगङ्गाधर तिलकः निबंध:  | Sanskrit Essay on Bal Gangadhar Tilak मम प्रिय नेता संस्कृत निबंध लोकमान्य तिलक |